❣️

दुनिया के तमाम डाकखाने प्रेम से चलते है

और कचहरियाँ नफ़रत से।

कोई हैरत नहीं कि डाकखाने कम हो गए

और कचहरियाँ बढती चली गई ।

हम दोनो रोज कम से कम एक चिट्ठी तो एक दूसरे को लिख ही सकते है।

या फिर तुम मुझे कभी कभी कोई किताब भिजवाना❣️।

6 responses to “❣️”

  1. This is just wonderful!

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    1. Hey ! Thanks alot❣️

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