
दुनिया के तमाम डाकखाने प्रेम से चलते है
और कचहरियाँ नफ़रत से।
कोई हैरत नहीं कि डाकखाने कम हो गए
और कचहरियाँ बढती चली गई ।
हम दोनो रोज कम से कम एक चिट्ठी तो एक दूसरे को लिख ही सकते है।
या फिर तुम मुझे कभी कभी कोई किताब भिजवाना❣️।
Milan Pathania❣️ Ink and emotions intertwine as love blooms or the heart shatters❣️ minipathania480@gmail.com

दुनिया के तमाम डाकखाने प्रेम से चलते है
और कचहरियाँ नफ़रत से।
कोई हैरत नहीं कि डाकखाने कम हो गए
और कचहरियाँ बढती चली गई ।
हम दोनो रोज कम से कम एक चिट्ठी तो एक दूसरे को लिख ही सकते है।
या फिर तुम मुझे कभी कभी कोई किताब भिजवाना❣️।